Friday, 4 May 2018

गाय क्योंकि वोट नहीं देती

नवनिर्वाचित पंजाब सरकार के आर्थिक अनुशासन की छुरी गऊ माता के गले पर चलती दिखाई दे रही है। राज्य की निवर्तमान सरकार ने गौशालाओं को मुफ्त बिजली-पानी की सुविधा दी, परंतु वर्तमान में गौशालाओं को भारी भरकम बिजली के बिल थमाए जा रहे और कनेक्शन काटने की चेतावनी दी जा रही है। राज्य में केवल गौशालाओं को ही नहीं बल्कि लंबे समय से अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और किसानों को भी बिजली बिलों में भारी राहत दी जा रही है, परंतु क्योंकि गाय वोट नहीं देती, राजनीतिक लॉबिंग नहीं करती, धरना-प्रदर्शन नहीं करती, इसीलिए उससे किसी भी तरह की सुविधा छीनना सामथ्र्यशाली शासन प्रशासन के लिए आसान काम है।

राज्य में 472 गौशालाएं हैं जो विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, ग्रामीण व किसान संगठनों द्वारा संचालित हैं। इनका वार्षिक बिजली का बिल 4.57 करोड़ रुपये बनता है। विगत सरकार ने इसके लिए चार किश्तों में पंजाब राज्य ऊर्जा निगम (पीएसपीसीएल) को भुगतान की व्यवस्था की। राज्य में चुनावी आचार संहिता के चलते भुगतान की पिछली तिमाही की किश्त जारी नहीं की जा सकी जिसके चलते कार्रवाई हो रही है। गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री कीमती लाल भगत ने इसे तकनीकी गड़बड़ी मानते हुए आग्रह किया है कि प्रदेश में गौसेवा का कार्य चलते रहना चाहिए।

बेसहारा गौवंश को लेकर राज्य की स्थिति काफी चिंताजनक है। आश्रयहीन गौवंश किसानों की फसलें बर्बाद करते हैं। किसान सारा दिन मेहनत कर फसलों की बिजाई व सिंचाई करता है और रात को पहरेदारी को मजबूर है। सड़कें व मोहल्ले इन पशुओं से अटे पड़े हैं और बकौल गौसेवा आयोग हर तीसरे दिन कहीं न कहीं इन पशुओं के चलते होने वाली दुर्घटनाओं में एक व्यक्ति की जान जाती है। घायलों व छोटी-मोटी दुर्घटनाओं की कोई गिनती नहीं। इन पशुओं के चलते किसानों के बीच जो टकराव की घटनाएं होती हैं वह अतिरिक्त समस्या है। ऐसी परिस्थितियों में राज्य की इन 472 गौशालाओं ने 2.80 लाख से अधिक गौवंश को आश्रय दिया हुआ है। सड़कों व खेतों में घूम रहे गौवंश को आश्रय देने के लिए बहुत सी नई गौशालाएं खोलने व स्थापित गौधामों को और सशक्त करने की आवश्यकता है परंतु होता कुछ और ही न आ रहा है।

गौसेवा, संरक्षण व रक्षा में पंजाब के लोगों का कोई सानी नहीं है। हमारे गुरुओं, सद्गुरु राम सिंह कूका व उनके अनुयायियों, संतों-महात्माओं ने गौवंश की रक्षा के लिए जो प्रयास व बलिदान किए वह हमारे इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय  है। गौवंश की कृपा से ही पंजाब की किसानी व जवानी दुनिया में विख्यात रही है। लेकिन यहां गऊ माता की दुर्दशा का दुष्चक्र उस समय शुरू हुआ जब श्वेत क्रांति के नाम पर दूध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास हुआ और इस कोशिश में राज्य की मूल नस्ल साहीवाल सहित अन्य स्वदेशी गौवंश की उपेक्षा कर राज्य को फर्जीयन होल्सटीन जैसी गायों (स्थानीय भाषा में अमेरिकन गाय) से पाट दिया गया। अब कुछ वैज्ञानिक कहने लगे हैं कि अमेरिकन गाय वास्तव में गाय नहीं बल्कि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया जीनसंवद्र्धित पशु है जो गाय जैसा दिखता है। दावा यह भी किया जा रहा है कि इस अमेरिकन गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इस पशु की दूध देने की समय अवधि केवल 3-4 साल है परंतु आयु लगभग 18-20 साल। इसी कारण किसान व पशुपालक इन पशुओं को दूध सूखने के बाद छोटी उम्र में ही सड़कों पर छोड़ देते हैं। आज राज्य में सड़कों पर भटक रही इसी नस्ल की कथित गायों की संख्या अधिक देखने को मिल रही है। कहने का भाव कि कुछ दशक पहले गलती सरकारों व बाबुओं की और आज भुगतना पूरे राज्य को पड़ रहा है।

गौसेवा मिशन के परमाध्यक्ष स्वामी कृष्णानंद जी कहते हैं कि वर्तमान में राज्य की बागडोर उस गौभक्त पटियाला राजघराने से संबंधित  कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों में है जिनके पूर्वजों ने रियासत में गौशालाओं व चरागाहों के लिए गांवों में हजारों एकड़ मीन दानस्वरूप दी थी। राज्य की जनता को मुख्यमंत्री से पूरी अपेक्षा है कि वह गौवंश की रक्षा, सुरक्षा, संरक्षण के लिए अपने संवैधानिक दायित्वों के साथ-साथ अपने पूर्वजों की इस गौरवशाली परंपरा का भी पालन करें। गाय चाहे वोट नहीं देती परंतु इसका आशीर्वाद या हाय बड़े-बड़े शासकों का भाग्य बना या बिगाड़ सकती है।
- राकेश सैन
32, खण्डाला फार्मिंग कालोनी,
वीपीओ रंधावा मसंदा,
जालंधर।
मो. 09779-14324

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