डोकलाम मुद्दे पर चीन को पीछे धकेलने के बाद भारतीय विदेश नीति की पगड़ी में एक और मोरपंख उस समय सजता नजर आया जब ब्रिटिश सरकार ने दाऊद इब्राहिम की 6.7 अरब डालर जिसकी भारतीय कीमत 43000 करोड़ है की संपत्ति जब्त कर ली। यह वही ब्रिटेन है जो खालिस्तानी आतंकवादियों, कश्मीरी अलगाववादियों, एलटीटीई जैसे संगठनों व इनके नेताओं को अपने यहां राजनीतिक शरण देता रहा है।यह भारत की विदेश नीति की ही जीत है जो आतंकवाद के मोर्चे पर विश्व समुदाय का समर्थन जुटाने में सफल हो रही है।
डोकलाम मुद्दे पर अहंकारी चीन को पीछे धकेलने की उपलब्धि के बाद भारतीय विदेश नीति की पगड़ी में एक और मोरपंख उस समय सजता नजर आया जब ब्रिटिश सरकार ने दाऊद इब्राहिम की 6.7 अरब डालर जिसकी भारतीय कीमत 43000 करोड़ है की संपत्ति जब्त कर ली। साल 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के आरोपियों को पिछले सप्ताह ही सजा मिलने के बाद 'डी-कंपनी' को यह दूसरा झटका है। भारत की इस सफलता से आस बंधने लगी है कि भय के मारे में बिल दर बिल छिप रहे चूहे डाऊद और चूहेदानी के बीच अंतर अब कम होता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में ब्रिटेन के दौरे के दौरान आतंकवाद व उसके आर्थिक पोषण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
ब्रिटिश अथॉरिटी ने भारत के दुश्मन और अंडरवल्र्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्ति जब्त की है। रिपोर्ट के अनुसार जब्त की गई संपत्ति की कीमत 6.7 अरब डॉलर है। दाऊद इब्राहिम जो वर्तमान में पाकिस्तान के कराची से अपना साम्राज्य चलाता है, के खिलाफ भारत सरकार की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। बीते महीने यूके के वित्त संबंधी विभाग ने दाऊद की संपत्ति की सूची बनाई थी। जिसके बाद इतने बड़े पैमाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार दाऊद दुनियाभर में एक दर्जन से ज्यादा देशों में अपना व्यापार चलाता है। इनमें यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण एशिया के देश भी शामिल हैं। सिर्फ ब्रिटेन में दाऊद की 450 मिलियन डॉलर की संपत्ति है। दाऊद ने अलग-अलग देशों में 50 से ज्यादा व्यवसायों में निवेश किया है। डॉन दाऊद इब्राहिम, जो 1993 में मुंबई में हुए धमाकों का अपराधी है, को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् ने आईएस और अलकायदा जैसे आंतकी संगठनों के साथ दाऊद पर भी प्रतिबंध लगा रखा है।
याद रहे कि मुंबई में हुए बम धमाकों के मामले में विशेष टाडा अदालत ने बीते दिनों दो दोषियों को मौत की सजा और अबु सलेम एवं एक अन्य दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। विशेष अदालत ने एक अन्य दोषी रियाज सिद्दिकी को 10 साल की सजा सुनाई। धमाके में संलिप्तता के लिए दोषी मोहम्मद ताहेर मर्चेट एवं फिरोज खान को मौत की सजा सुनाई। अबु सलेम व करीमुल्लाह खान को उम्रकैद की सजा सुनाई वहीं एक अन्य दोषी रियाज सिद्दिकी को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। यह सभी कुख्यात डी-कंपनी के ही चट्टे-बट्टे हैं और इस सजा को दाऊद गैंग के लिए एक बड़ा झटका माना गया था और अगले ही सप्ताह ब्रिटेन ने भी उस कुख्यात आतंकी को झटक दिया है।
यह भारत की विदेश नीति की ही जीत है जो आतंकवाद के मोर्चे पर विश्व समुदाय का समर्थन जुटाने में सफल हो रही है। याद रहे कि यह वही ब्रिटेन है जो खालिस्तानी आतंकवादियों, कश्मीरी अलगाववादियों, एलटीटीई जैसे संगठनों व इनके नेताओं को अपने यहां राजनीतिक शरण देता रहा है। ब्रिटेन इन संगठनों को आतंकी न मान कर इन्हें पीडि़त देशों की राजनीति से जोड़ कर देखता रहा है। आज भी खालिस्तान समर्थक आतंकी ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका जैसे देशों में न केवल शरण लिए हुए हैं बल्कि पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयास करते रहते हैं। यहां तक कि कुछ खालिस्तान समर्थक तो इन देशों की राजनीकि व्यवस्था तक में घुसपैठ कर आतंकवाद के प्रति इन देशों की नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते रहते हैं। अभी हाल कैनेडा से भारत दौरे पर आए एक मंत्री हरजीत सिंह सज्जन पर खालिस्तान समर्थक होने के आरोप लगे और इसके चलते पंजाब सरकार ने तो उसका औपचारिक स्वागत तक करने से इंकार कर दिया था। अकेले हरजीत सिंह सज्जन ही नहीं, इन देशों में एक खालिस्तान समर्थक सशक्त लॉबी पैदा हो चुकी है जिसे लाइन पर लाना भी भारत के साथ-साथ युरोपीयन देशों के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि आतंकवाद के मोर्चे पर ईमानदारी दिखाने के लिए अभी ब्रिटेन के लिए भी बहुत कुछ करना शेष है और आतंकवाद पर सख्ती को लेकर हमारा सफर भी समाप्त नहीं हुआ है। जब तक सभी आतंकी संगठन व आतंकी नेता अपनी परिणती तक नहीं पहुंचते हमें चैन से नहीं बैठना चाहिए। उक्त संदर्भों से दाऊद पर भारत को मिली सफलता को करके नहीं आंका जा सकता।
लगता है कि दुनिया अब आतंकवाद पर भारत का दु:ख समझने लगी है। भारत कई दशकों से पड़ौस द्वारा फैलाए आतंकवाद की आग में झुलस रहा है परंतु दुनिया के देशों ने इस तपिश को तब अनुभव किया जब इसकी आंच उनके अपने घर तक पहुंची। 9/11 के हमले के बाद ब्रिटेन, फ्रांस सहित अनेक युरोपीयन देशों में आतंकी हमले हो चुके हैं जिनमें सैंकड़ों निर्दोष लोगों ने जान गंवाई। दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ बने जनमत व भारतीय विदेश नीति का ही प्रभाव है कि चीन में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में चीन को भी अनमने मन से आतंकवाद के खिलाफ सख्त स्टैंड लेना पड़ा।
- राकेश सैन
मो. 097797-14324

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