डोकलाम में सेना की वापसी के बाद कुछ लोग मानते हैं कि चीन सुधर गया और देश की उत्तरी सीमा खतरामुक्त है तो वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं। परंतु शुक्र है कि केंद्र सरकार जागरुक है और एशिया में उभर रहे नए खतरे को भांप रहा है। इस दिशा में भारत और जापान की बढ़ रही नजदीकियां न केवल खुद इन देशों बल्कि पूरे एशिया में शक्ति संतुलन स्थापित करने में सहायक साबित होने वाली है।
जापान भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना शुरू करने जा रहा है जिसका 14 सितंबर को भूमिपूजन होने जा रहा है। मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन की परियोजना 2022 तक पूरा होने की संभावना है। आशा की जानी चाहिए कि इस परियोजना के जरिए भारत अपने चिरप्रतिद्वंद्वी देश चीन की चालाकियों का मूंहतोड़ जवाब देने में सफल होगा। डोकलाम में चारों खाने चित्त होने के बाद भी चीन ने हार नहीं मानी है, वह एशिया में उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के साथ मिल कर शक्ति संतुलन बिगाडऩे की फिराक में है। वह उत्तरी कोरिया के सनकी तानाशाह को मूूक समर्थन दे रहा है, वह तानाशाह जो आज अमेरिका और जापान के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है। उत्तर कोरिया के चलते जहां पड़ौसी देश जापान परेशान है उसी तरह पाकिस्तानी आतंकवाद के चीनी समर्थन के चलते भारत भी। इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि जिन घातक हथियारों का परीक्षण आज उत्तर कोरिया कर रहा है कल को वह तकनीक पाकिस्तान तक भी पहुंच जाए। ज्ञात रहे पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिकों पर उत्तरी कोरिया को परमाणु तकनोलोजी देने के आरोप अतीत में लगते रहे हैं। यानि चीन, पाकिस्तान और उत्तरी कोरिया एशिया में नए शक्ति केंद्र के रूप में उभरने का प्रयास कर रहे हैं या इसकी कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में भारत और जापान की मित्रता इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन पैदा करने वाली साबित होने जा रही है। केवल इतना ही नहीं चीन दक्षिणी चीन सागर पर अपना अधिकार जमा रहा है जो भारत और जापान की संयुक्त आपत्ति व चिंता का कारण है। आज एशिया चीन, पाकिस्तान व उत्तरी कोरिया की गतिविधियों के चलते उबल रहा है और विकल्प की तलाश में है। भारत-जापान एशिया ही नहीं दुनिया को यह विकल्प उपलब्ध करवा सकते हैं।
वैसे विकल्प तैयार करने की कोशिशें यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही आरंभ हो चुकी थी परंतु इसमें गति उस समय आई जब 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी ने अपना पहला विदेश दौरा जापान से ही शुरू किया। मोदी व जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच निजी मित्रता भी रही है जिसका परिणाम है कि इससे पहले पने भारत दौरे के दौरान श्री आबे ने श्री मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी का दौरा किया और अब उनके गृहक्षेत्र गुजरात में जा रहे हैं। भारत ने जहां एक्ट ईस्ट नीति का अनुसरन किया है वहीं जापान ने फ्री एंड ओपन इंडो पैसेफिक नीति का पालन किया है ताकि दक्षिणी चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके। अतीत में भारत और जापान परस्पर एक दूसरे के पक्ष में ब्यान देने तक ही सीमित थे परंतु अब पहली बार देखने को मिला जब डोकलाम विवाद में जापान खुल कर भारत के पक्ष में मैदान में उतरा। दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु समझौता भी इसी साल जुलाई में संपन्न हुआ। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त युद्ध अभ्यास भी कर चुकी हैं। अब आशा की जानी चाहिए कि श्री शिंजो आबे की भारत यात्रा व बुलेट ट्रेन के माध्यम से दोनों देशों के बीच सहयोग और मित्रता की नई कथा रची जा सके जिससे आतंकी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने वाले पाकिस्तान, तानाशाही देश उत्तरी कोरिया व विस्तारवादी चीन की जुंडली पर प्रभावी अंकुश लग सके।
- राकेश सैन
मो. 097797-14324

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